Home / अन्य / बाबा साहेब और ओबीसी का रिश्ता

बाबा साहेब और ओबीसी का रिश्ता

पं0 बाबा नंद किशोर मिश्र 

इस देश में अन्य पिछड़ी जातियों का संवैधानिक जन्मदाता और संवैधानिक रखवाला कोई और नहीं बल्कि स्वयं बाबासाहब डॉ आंबेडकर ही रहे हैं !

1928 में बाम्बे प्रान्त के गवर्नर ने स्टार्ट नाम के एक अधिकारी की अध्यक्षता में पिछड़ी जातियों के लिए एक कमिटी नियुक्त की थी. इस कमिटी में डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर ने ही शूद्र वर्ण से जुड़ी जातियों के लिए अदर बैकवर्ड कास्ट अर्थात अन्य पिछड़ी जातियां शब्द का सर्वप्रथम उपयोग  किया था, इसी शब्द का संक्षितप्त रूप ओबीसी है।

इस वर्ग को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी हुई जाति के रूप में आज हम पहचानते हैं और

उनको पिछड़ी जाति या ओबीसी कहते है। स्टार्ट कमिटी के समक्ष अपनी बात रखते हुए डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर ने देश की जनसंख्या को तीन भाग में बांटा था.

(1) अपरकास्ट-

जिसमे ब्राह्मण, क्षत्रिय-राजपूत और वैश्य जैसी उच्च वर्ण जातियां आती थीं

(2) बैकवर्ड कास्ट-

जिसमें सबसे पिछड़ी और अछूत बनायी गई जातियां और आदिवासी समुदाय की जातियों को समाविष्ट किया गया था।

(3) जो जातियाँ बैकवर्ड कास्ट और अपर कास्ट के बीच में आती थीं ऐसी शूद्र वर्ण की मानी गई जातियों के लिए अदर बैकवर्ड कास्ट अर्थात अन्य पिछड़ी जातियां शब्द का प्रयोग किया गया था।

बाबासाहब ने ही संविधान के अनुच्छेद 340 धारा में ओ0बी0सी0 को पहचान उनकी गिनती कर, उनको उनकी संख्या के अनुपात में जातिगत आरक्षण का प्रावधान किया !

क्योंकि उस समय तक ओ0बी0सी0 की जातियों की सूची ही नही बनी थी।

बाबासाहब ने ही ओ0बी0सी0 के लिए निर्मित संविधान के अनुच्छेद 340 को लागू कराने का दबाव  कांग्रेस पर डाला। पर कांग्रेस के ब्राह्मण प्रधानमन्त्री नेहरू इसके लिए तैयार नहीं हुए।

इसीलिए बाबासाहब ने अपने कैबिनेट मंत्री पद और कांग्रेस दोनों से इस्तीफा दे डाला।

ओ0बी0सी0 के लिए कैबिनेट के मंत्रीपद को लात मारने वाले भारत के एक मात्र नेता बाबासाहब डॉ आंबेडकर ही हैं।

पर यह बात आज तक ओबीसी से ब्राह्मणों ने छुपायी है। बाबा साहेब के दबाव एवं संवैधानिक बाध्यता के कारण ही बाद में ब्राह्मण नेहरू ने ब्राह्मण जाति के काका कालेलकर आयोग का गठन ओ0बी0सी0 की जातियों को पहचान के लिए बनाया।

संविधान के अनुच्छेद 340 के अनुसार राष्ट्रपति एक

कमीशन नियुक्त करेंगे और कमीशन ओ0बी0सी0 जातियों की पहचान कर के उनके विकास के लिए जो सिफारिशें करेगा उनको अमल में लाया जाएगा।

संविधान के अनुच्छेद 15-(4), 16(4) के अनुसार ओ0बी0सी0 जातियों के सरकारी तन्त्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए सरकार उचित कदम उठाएगी.

शासन और प्रशासन में प्रभुत्व जमाये बैठे ब्राह्मणी जातिवादियों ने ओ0बी0सी0 के लिए नियुक्त काका कालेलकर कमीशन की रिपोर्ट को संसद के समक्ष भी नहीं रखा और कालेलकर कमीशन की रिपोर्ट को कभी भी मान्यता नहीं दी या लागू नहीं किया गया।

1978 में केन्द्र सरकार ने ओबीसी जातियों की पहचान और उनकी उन्नति की सिफारिशों के लिए दूसरा कमीशन बी0पी0 मंडल की अध्यक्षता में नियुक्त किया।

मंडल कमीशन रिपोर्ट-1980 को भी सत्ता मे प्रभुत्व जमाये बैठे जातिवादियों ने लागू करने की जरुरत न समझी और 1990 तक मंडल कमीशन की रिपोर्ट सचिवालय की अलमारी में धूल खाती रही।

7 अगस्त 1990 के दिन प्रधानमन्त्री वी0पी0 सिंह की केन्द्र सरकार ने देश के 52 प्रतिशत ओबीसी समुदाय के लिए मंडल

कमीशन की सिफारिशों के अनुसार केन्द्रीय नौकरियों में 27 प्रतिशत ओ0बी0सी0 आरक्षण लागू करने की घोषणा की, जिसके विरोध में ब्राह्मणों ने देशभर में मंडल विरोधी आंदोलन प्रारंभ किया।

इस प्रकार एक सुनियोजित षडय़ंत्र के तहत बाबा साहेब डॉ आम्बेडकर को पिछड़े वर्गों का विरोधी बताया जाता है ताकि सदियों से शोषित सम्पूर्ण शूद्र समाज (ओ0बी0सी0 एस0सी0/एस0टी0) को आपस में लडा कर मलाई काटी जा सके और उत्तर प्रदेश में यह काम इन्होंने बखूबी अंजाम दिया है। अब समय आ गया है कि इनके षडयंत्र को समझते हुए आपस में एकता बनाएं और सम्पूर्ण  समाज को मजबूत करें।

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जिस भारत के निर्माण के लिए संघर्षरत रहे उस भारत में कहीं पर भी जातिवाद के लिए या छुआछूत के लिए कोई स्थान नही था। आज हमें बाबा साहेब के सपनों के भारत के निर्माण के लिए भारत में जाति तोड़ो और समाज जोड़ो जैसी आदर्श रणनीति पर काम करने की आवश्यकता है। इसके लिए यह आवश्यक है कि हम सामाजिक समरसता उत्पन्न करने के लिए अवसर की समानता सभी लोगों के लिए सहज रूप में उपलब्ध करायें।

हमें डा. भीमराव अंबेडकर जी के आरक्षण संबंधी विचारों के पीछे की उस शक्ति को पहचानने की आवश्यकता है जो उन्हें एक सहनशील और सामाजिक समरसता से परिपूर्ण भारत बनाने के लिए प्रेरित कर रही थी। जातिगत आरक्षण को लेकर हम लड़ें झगड़ें नही, अपितु संविधान की मूलभावना के अनुसार कार्य करते हुए ‘सबका साथ और सबका विकास’ को अपना राष्ट्रीय आदर्श मानते हुए काम करें।

About Akhil Bharat Hindu Mahasabha