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भारतीय नस्ल की गाय का रक्षा की जरूरत 

संजय कुमार

एक समय था जब भारत में गाय का सम्बन्ध सम्पत्ति से जोड़ा जाता था. परन्तु आज गाय का सम्बन्ध मजबूरी और लाचारी से जोड़ दिया गया है. यह मान्यता हमें बदलनी होगी. हमारे महापुरुष गाय को बहुत महत्त्व देते थे. 1000 सालों की विधर्मियों के शासन ने इसको बहुत नुक्सान पहुचाया. परन्तु धर्म निरपेक्ष संविधान में भी गाय को हिन्दू माना और वोट बैंक के लिए गौ सुरक्षा को महत्व नहीं दिया. जैसे बूढ़े माता पिता को घर से बाहर निकालना गलत है वैसे ही दूध ना देने वाली गाय को.

गाय की रक्षक – गौचर भूमि गाय की सबसे बड़ी रक्षक है. इस देश में हजारों वर्षो से गौचर भूमि के कारण गाय रखना बहुत आसान था. आजादी के बाद सबसे ज्यादा कब्जा गौचर भूमि पर हुआ है. सरकार ने भी सबसे अधिक गौचर भूमि का ही अधिग्रहण किया है और वहां पर बड़े उद्योगपतियों को भूमि दी है. इसी कारण देश में गाय कूड़ा खाती है. आज सबसे बड़ी जरुरत है कि हम गाय रक्षा में अपना योगदान दे.

आज गौ के लिए दान से अधिक जरुरत भावना की है. हमारा कर्त्तव्य है कि पंचगव्य से बने उत्पादों का प्रयोग करे. टीवी पर विज्ञापन देख कर साबुन खरीदने से गौरक्षा नहीं होगी. हमें हर वह उत्पाद खरीदना होगा जो गौशालाए बनाती है. गाय बचाने की जिम्मेवारी केवल सरकार पर छोड़ना उचित नहीं है. केवल यह कहना कि सरकार कानून बनाए और गौरक्षा हो जाएगी गलत है.

हम क्या करे-

1- विषमुक्त खेती के लिए कार्य करे. अत्यधिक जहरीले कैमिकल रोग का कारण बन रहे हैं. गौमूत्र + गोबर से बना हुआ जीवामृत उपज में कमी नहीं आने देता. इस विषय पर जो कार्य हुआ है उसकी जानकारी इकठ्ठी करे.

2- यह उम्मीद ना करे कि गाय दूध देगी तभी हमें लाभ होगा. पंचगव्य के उत्पादों को खरीद कर गौशालाओं को लाभ पहुंचाए.

3- भारतीय गाय के स्पर्श में भी गुण है जो विदेशी नस्लों में नहीं है. भारतीय गाय के ऊपर कुछ समय तक हाथ फेरने से तनाव दूर हो जाता है और बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कम हो जाता है. यह बात बार बार अनुभव में आई है. इसी से भारतीय गाय की महत्ता प्रकट होती है.

4- हमारा आदर्श वाक्य है – अहिंसा परमो धर्मः जीव दया उत्तम कर्म- विदेशी उत्पादों में किस पशु को मार कर मिलाया है हमें नहीं पता. इसलिए विदेशी का मोह हमें छोड़ना होगा.

5- भाई राजिव दीक्षित जी स्वदेशी पर बहुत जोर देते थे. आज हम कोलगेट ख़रीदे या पेप्सोडेंट. फायदा विदेशी गौभक्षक को मिलता है. भारतीय संस्कृति का मजाक उड़ाने वाले टीवी चैनल इसी पैसे से उछलते हैं. यदि आज 10 प्रतिशत लोग भी गाय से बने हुए मंजन का प्रयोग करेंगे तो गौ रक्षा अपने आप हो जाएगी.

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