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मीडिया बिना जानें किसी को हिन्‍दू महासभा का अध्‍यक्ष मत कहे

लखनऊ, उप्र । मीडिया बिना सोचे समझे किसी भी स्वयंभू व्यक्ति को हिन्दू महासभा का अध्यक्ष या अन्य पदाधिकारी ना बताये और ऐसा करना न्यायलय के आदेशों का सरासर उल्लंघन है। उपरोक्‍त बातें अखिल भारत हिन्‍दू महासभा की उत्तर भारत मंत्री सुश्री रीता राय नें आज फोन पर जानकारी दी । आगे सुश्री राय नें कहा कि राम जन्‍मभूमि पर  चन्‍द्र प्रकाश कौशिक व चक्रपाणी उर्फ राजेश श्रीवास्‍तव की कैबिएट को सुप्रीम कोर्ट नें निरस्‍त कर दी है । राजेश श्रीवास्‍तव उर्फ चक्रपाणी और चंद्र प्रकाश कौशिक राष्‍ट्र की विधायिक व न्‍यायपालिका के आदेश की अवमानना कर घोर अपराध कर रहे हैं। अदालत के निर्णय के अनुसार ये लोग अपनें आपको राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष नहीं कह सकते फिर भी न्‍यायालय के विरूद्ध जाकर अपने को राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष घोषित कर रहे हैं, अखबारों में इसी नाम और पद से विज्ञापन व विज्ञप्ति  दे रहे हैं ।

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सनद रहे कि  राजेश श्रीवास्‍तव उर्फ चक्रपाणी व चंद्र प्रकाश कौशिक हिन्दू महासभा के स्वयंभू घोषित अध्यक्ष हैं। जबकि वास्तव में चक्रपाणी हिन्दू महासभा के सदस्य भी नहीं है।  इसके लिए उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय का भी सन्दर्भ दिया और कहा कि स्वामी चक्रपाणी हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं है। इस निर्णय की पुष्टि दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने भी कर दी है। चक्रपाणी को अभी भी खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं कहना चाहिए और ऐसा करना माननीय न्यायालय का अपमान है। जो व्यक्ति हिन्दू महासभा का सदस्य भी न रहा हो वह अध्यक्ष तो क्या किसी भी पद पर नहीं रह सकता है। हाईकोर्ट ने कहा था कि यह अधिकार “हिन्दू महासभा की केन्द्रीय उच्चाधिकार समिति” के पास है और उस समय केन्द्रीय उच्चधिकार समिति के अध्यक्ष डॉ संतोष राय थे। अब “केन्द्रीय उच्चाधिकार समिति” के अध्यक्ष बाबा नन्द किशोर मिश्र हैं। हिन्दू महासभा कि केन्द्रीय उच्चाधिकार समिति द्वारा डाले गए वाद संख्या SLP3600 को श्री राम लला विराजमान के लिए मान्य किया गया। स्वामी चक्रपाणी संत भी नही हैं। उनके सम्बन्ध आजम खान और अन्य साम्प्रदायिक नेताओं से भी है।

सुश्री रीता राय नें आगे बताया कि हिन्दू महासभा की संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत कार्यकारिणी कार्य कर रही है। जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य रमेश मिश्र, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बाबा(पं) नन्द किशोर मिश्र, राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ0  संतोष राय, राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य मदन सिंह एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता राकेश आर्य इत्यादि द्वारा संचालित है, न्यायलयके निर्णय के पश्चात यह तदर्थ कार्यकारिणी स्वतः समाप्त हो जाएगी और माननीय न्यायलय के देख-रेख में पुनः संगठन का चुनाव होगा।

सुश्री राय ने कहा कि हिन्दू महासभा के नाम पर अनेक लोगों ने अपने आपको स्वयम्भू अध्यक्ष घोषित कर रखा है जिसके सन्दर्भ में दिल्ली उच्च न्यायलय में वाद संख्या 745/2014 बाबा नन्द किशोर मिश्र बनाम श्री दिनेश चन्द्र त्यागी वगैरह लंबित है । अंतरिम आदेश में उच्च न्यायलय नें,  भारत के निर्वाचन आयोग ने किसी भी व्यक्ति को स्वयंभू अध्यक्ष मानने से मना कर दिया ।

सुश्री राय नें  अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सभी को यह भी पता है कि जब साधुओं कि अखाड़ा परिषद ने चक्रपाणी को साधू मानने से मना कर दिया तो चक्रपाणी ने एक संत सभा नाम का संगठन खड़ा किया और फर्जी लोगों को साधू संत का प्रमाण पत्र देने लगे। चक्रपाणी का एक साथी है प्रमोद कृष्णन जो कि अपने को कल्कि पीठाधीश्वर कहता है उसके सम्बन्ध आजम खान और अन्य साम्प्रदायिक नेताओं से अच्छे हैं।

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