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राष्ट्रवादी कहानियां

अगर मुसलमान हो गए तो फिर कभी नहीं मरेंगे न?

अगर मुसलमान हो गए तो फिर कभी नहीं मरेंगे न?

इतिहास में बहुत कम मिसाल मिलेंगी… जब किसी बाप ने कौम के लिए… राष्ट्र के लिए… एक हफ्ते में अपने 4–4 बेटे क़ुर्बान कर दिए हों. आज पूस का वो आठवां दिन था जब दशम् गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज के दो साहबजादे चमकौर साहब के युद्ध में शहीद हो गए। बड़े साहबजादे श्री अजीत सिंह जी की ... Read More »

बुलंद नारों नें अंग्रेजों  की हुकूमत को हिला दिया

बुलंद नारों नें अंग्रेजों की हुकूमत को हिला दिया

 *अर्चना महतो  बजा बिगुल विद्रोह का, नारों ने भरी हुंकार हिली हुकूमत अंग्रेजों की, जब चले शब्दों के बाण जरूरी नहीं कि भावों को व्यक्त करने के लिए हमेशा शब्दों का इस्तेमाल किया जाए, लेकिन जब बात तीव्र और सशक्त अभिव्यक्ति की हो तो शब्द अनिवार्य बन जाते हैं। शब्द, भावों की शक्ति और जज्बातों की जुबां है। ऐसी जुबां ... Read More »

वो पिटते रहे लेकिन भारत माता की जय बोलना बंद नहीं किया

वो पिटते रहे लेकिन भारत माता की जय बोलना बंद नहीं किया

चंद्रशेखर को न्यायालय में मजिस्ट्रेट के सामने ले जाया गया। उन दिनों बनारस बहुत कठोर मजिस्ट्रेट नियुक्त था। बात-बात में वकीलों को वह सुना-सुनाकर कहता की किसी को पकड़कर छोड़ना तो चिड़ीमार का काम होता है, किसी मजिस्ट्रेट का काम थोड़े ही है ! मजिस्ट्रेट का काम तो सज़ा देना होता है। पुलिस वाले अपराधी को सामने लाए की सज़ा ... Read More »

चमकौर का युद्ध- जहां 10 लाख मुग़ल सैनिकों पर भारी पड़े थे 40 सिक्ख

चमकौर का युद्ध- जहां 10 लाख मुग़ल सैनिकों पर भारी पड़े थे 40 सिक्ख

22 दिसंबर सन्‌ 1704  को सिरसा नदी के किनारे चमकौर नामक जगह पर सिक्खों और मुग़लों के बीच एक ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया जो इतिहास में “चमकौर का युद्ध” नाम से प्रसिद्ध है। इस युद्ध में सिक्खों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के नेतृत्व में 40 सिक्खों का सामना वजीर खान के नेतृत्व वाले 10 लाख मुग़ल सैनिकों से ... Read More »

देश की आजादी में भगत सिंह की की अहम भूमिका

देश की आजादी में भगत सिंह की की अहम भूमिका

क्रांतिकारी ही नहीं लेखक व दार्शनिक भी थे भगत सिंह अंग्रेजों में शासनकाल में भारतीय जनता दोहरी मार से त्रस्त थी। एक ओर तो स्थानीय जमींदारों, जागीरदारों और पूंजीपतियों द्वारा गरीब किसानों, मजदूरों का शोषण किया जाता था, वहीं दूसरी ओर अंग्रेजी शासक भी इन्हीं लोगों पर जुल्म करते थे। सारी जनता अंग्रेजों, जमींदारों और सूदखोरों के चंगुल में फंसी ... Read More »

पण्डित लेखराम

पण्डित लेखराम

पण्डित जी ने एक बार एक हिन्दू लड़की की अपनी जान को जोखिम में डालकर रक्षा की। उन्हें किसी ने सूचना दी कि लाहौर की बादशाही मस्जिद में एक हिन्दू लड़की को शुक्रवार के दिन बालत् मुसलमान बनाया जाएगा। लड़की को कुछ लोग पहले ही अपहरण करके ले जा चुके थे। पण्डित जी इस सूचना को पाकर बहुत दुःखी हुए। ... Read More »

भारतीय क्रांति के महानायक – वीर सावरकर

भारतीय क्रांति के महानायक – वीर सावरकर

मृत्‍युंजय दीक्षित भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महानायक विनायक दामोदर सावरकर का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर ग्राम में 28 मई 1883 को हुआ था। विनायक के पिता का नाम दामोदर पन्त तथा माता का नाम राधाबाई था। सावरकर जी चार भाई – बहन थे। वीर सावरकर न केवल स्वाधीनता संग्राम सेनानी थे अपितु वे एक महान चिंतक, लेखक, ... Read More »

धर्मपरिवर्तन और इस्लाम की नीति !

धर्मपरिवर्तन और इस्लाम की नीति !

जकारिया नायक जैसे लोग हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए इस्लाम का सिर्फ एक ही पक्ष पेश करते है .और दूसरे पक्ष को छुपा लेते हैं .और भोलेभाले लोग इस्लाम को ठीक से जाने बिना अपना धर्म छोड़कर मुसलमान बन जाते हैं ,और पछताते हैं ,क्योंकि इन लोगों को इस्लाम की दोहरी नीति के बारे में पता नहीं होता ... Read More »

वीर हरपाल देव का स्वतंत्रता आंदोलन एवं खुसरू खां की ‘हिन्दू क्रान्ति’

वीर हरपाल देव का स्वतंत्रता आंदोलन एवं खुसरू खां की ‘हिन्दू क्रान्ति’

एक का उठना एक का गिरना ये खेल निरंतर चलता है। नीति पथ के अनुयायी को जग में मिलती सच्ची सफलता है।। पथ अनीति का अपनाये जो, वह कागज के सम गलता है। कालचक्र जब घूमकर आये, तब चलती नही चपलता है।। अलाउद्दीन खिलजी ने निश्चित रूप से दिल्ली की सल्तनत को विस्तार दिया था। पर उसने दिल्ली सल्तनत को ... Read More »

रानी पद्मिनी राणा लक्ष्मण सिंह और कान्हड़देव की रोमांचकारी देशभक्ति

रानी पद्मिनी राणा लक्ष्मण सिंह और कान्हड़देव की रोमांचकारी देशभक्ति

राकेश कुमार आर्य भारत के वैभव और गौरव से प्रभावित होकर फे्रंच तत्वज्ञ विक्टर कजिन ने कहा है-‘‘इसमें संदेह नही कि प्राचीन हिंदुओं को वास्तविक ईश्वर का पूर्ण ज्ञान था। उनके विचार,उनका तत्व ज्ञान इतना श्रेष्ठ उदात्त तथा सत्य है कि उनके मुकाबले में यूरोपीय तत्व ज्ञान दोपहर के सूर्य के सामने चमकने वाले जुगनू की भांति फीका है।’’ जो ... Read More »