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हमारे पुरोधा

इस अनुभाग में पार्टी के महान् नेताओं, क्रांतिकारियों, देश के लिये समर्पित महानुभावों के बारे में पूरी जानकारी दी जायेगी।

उज्जैनी नरेश चक्रवती सम्राट महाराज विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के सबसे महान राजा क्यों थे ?

उज्जैनी नरेश चक्रवती सम्राट महाराज विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के सबसे महान राजा क्यों थे ?

उस पर मे आज आपको एक सच्ची कहानी सुनाता हूं । ” विक्रम संवत के प्रणेता महाराज विक्रमादित्य ” रात्री की निस्तब्धता का भंग करती हुई एक कुटिया में से रुदन की ध्वनि आ रही थी । भीतर एक वृद्धा थी जिसके नेत्रों की ज्योति मंद हो चुकी थी । उन ज्योतिहीन नेत्रों के भीतर से उष्ण आंसुओं की धार ... Read More »

भारतीय क्रांति के महानायक – वीर सावरकर

भारतीय क्रांति के महानायक – वीर सावरकर

मृत्‍युंजय दीक्षित भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महानायक विनायक दामोदर सावरकर का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर ग्राम में 28 मई 1883 को हुआ था। विनायक के पिता का नाम दामोदर पन्त तथा माता का नाम राधाबाई था। सावरकर जी चार भाई – बहन थे। वीर सावरकर न केवल स्वाधीनता संग्राम सेनानी थे अपितु वे एक महान चिंतक, लेखक, ... Read More »

आदि शंकराचार्य और मंदिर संस्कृति ने पढ़ाया एकता का पाठ

आदि शंकराचार्य और मंदिर संस्कृति ने पढ़ाया एकता का पाठ

राकेश कुमार आर्य छोटे-छोटे राज्य व्यक्ति की सोच को संकीर्ण बनाते हैं। व्यक्ति अपने राज्य के लोगों को ही अपना मानता है, और बाहरी लोगों ‘परदेशी’ मानता है। व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिए इसीलिए संपूर्ण भूमंडल को ‘एक देश’ या एक परिवार बनाने हेतु आर्यावर्त्तीय राजाओं ने चक्रवर्ती साम्राज्य स्थापित करने का आदर्श लक्षित किया। व्यक्ति के संपूर्ण ... Read More »

अभिनव क्रांतिकारी वीर सावरकर

अभिनव क्रांतिकारी वीर सावरकर

नासिक के समीप भगूर नामक ग्राम में 28 मई , सन् 1883 को जन्मे वीर सावरकर आधुनिक भारत के निर्माताओं की अग्रणी पंक्ति के जाज्लयमान नक्षत्र है । वे पहले ऐसे राष्ट्रभक्त विद्यार्थी थे , जिन्होंने अंग्रेजी सरकार का कायदा – कानून भारत में स्वीकार करने से इन्कार किया और लोगों को भी उस बारे में ललकारा । * ” ... Read More »

देशभक्‍त को गद्दार मत कहो

देशभक्‍त को गद्दार मत कहो

डॉ0 संतोष राय भारत माता के गगनांचल रूपी आंचल में ऐसे-ऐसे नक्षत्र उद्दीप्‍त हुये हैं, जो न केवल भारत भूमि को बल्कि संपूर्ण विश्‍व भू मंडल को अपने प्रकाश पुंजों से आलोकित किया है। ऐसे ही एक महान नक्षत्र का उदय भारत की पावन भूमि पर हुआ जो संपूर्ण जगत में नाथूराम गोडसे के नाम से विख्‍यात हुआ। वीर हुतात्‍मा ... Read More »

बुद्घ नही युद्घ’ के उद्घोषक सावरकर

बुद्घ नही युद्घ’ के उद्घोषक सावरकर

राकेश कुमार आर्य बात 10 मई 1957 की है। सारा देश 1857 की क्रांति की शताब्दी मना रहा था। दिल्ली में रामलीला मैदान में तब एक भव्य कार्यक्रम हुआ था। हिंदू महासभा के नेता वीर सावरकर यद्यपि उस समय कुछ अस्वस्थ थे, परंतु उसके उपरांत भी वह इस ऐतिहासिक समारोह में उपस्थित हुए थे। वह देश के पहले व्यक्ति थे ... Read More »

छत्रपति शिवाजी महाराज और उनकी मुस्लिम नीति

छत्रपति शिवाजी महाराज और उनकी मुस्लिम नीति

छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम सुनते ही हर भारतवासी का सीना उनकी न्यायप्रियता, वीरता, शौर्यता के कारण गर्व से फुल जाता हैं। कुछ पक्ष पाती इतिहासकारो ने शिवाजी की भरसक आलोचना यह कहते हुए की हैं शिवाजी केवल और केवल हिन्दू हितों के समर्थक थे। पर इतिहास सभी प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम हैं अगर पक्षपात रहित छानबीन की ... Read More »

हिन्दू महासभा की प्रचण्डता में ही छिपा है देश की अखण्डता का मूलमंत्र

हिन्दू महासभा की प्रचण्डता में ही छिपा है देश की अखण्डता का मूलमंत्र

राकेश कुमार आर्य हिंदू महासभा का अपना गौरवमयी अतीत है। 10 अप्रैल 1875 ई. में आर्यसमाज की स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती जी महाराज के द्वारा मुंबई में की गयी थी। उसके पश्चात हिंदू सभा पंजाब (1882 ई.) का जन्म हुआ। 1909ई. में बंगाल हिंदू सभा की स्थापना की गयी थी। इससे पूर्व 1906 ई. में ढाका में मुस्लिम लीग की ... Read More »

हुतात्मा महाशय राजपाल की बलिदान-गाथा एवं रंगीलारसूल

हुतात्मा महाशय राजपाल की बलिदान-गाथा एवं रंगीलारसूल

सन १९२३ में मुसलमानों की ओर से दो पुस्तकें ” १९ वीं सदी का महर्षि “और “कृष्ण,तेरी गीता जलानी पड़ेगी” प्रकाशित हुई थी. पहली पुस्तक में आर्यसमाज के संस्थापक स्वामी दयानंद का सत्यार्थ प्रकाश के १४ सम्मुलास में कुरान की समीक्षा से खीज कर उनके विरुद्ध आपत्तिजनक एवं घिनौना चित्रण प्रकाशित किया था जबकि दूसरी पुस्तक में श्री कृष्ण जी ... Read More »

स्वातंत्रय सेनानी वीर सावरकर – अन्याय से पूर्ण एक अमरगाथा

स्वातंत्रय सेनानी वीर सावरकर – अन्याय से पूर्ण एक अमरगाथा

वीर सावरकर  यह कहा जाए कि आधुनिक भारतीय इतिहास में जिस महापुरुष के साथ सबसे अधिक अन्याय हुआ, वह सावरकर ही हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। सावरकर ‘नाख़ून कटाकर’ क्रन्तिकारी नहीं बने थे। 27 वर्ष की आयु में, उन्हें 50-50 वर्ष के कैद की दो सजाएँ हुई थीं। 11 वर्ष के कठोर कालापानी के सहित उन्होंने कुल 27 वर्ष ... Read More »