Home / हिन्दू महासभा

हिन्दू महासभा

अखिल भारत हिन्दू महासभा भारत का एक राजनैतिक दल है। यह एक राष्ट्रवादी हिन्दू संगठन है। इसकी स्थापना सन १९१५ में हुई थी। विनायक दामोदर सावरकर इसके अध्यक्ष रहे। केशव बलराम हेडगेवार इसके उपसभापति रहे तथा इसे छोड़कर सन १९२५ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। भारत के स्वतन्त्रता के उपरान्त जब महात्मा गांधी की हत्या हुई तब इसके बहुत से कार्यकर्ता इसे छोड़कर भारतीय जनसंघ में भर्ती हो गये।

स्थापना

स्वराज्य के लिए मुसलिम सहयोग की आवश्यकता समझकर कांग्रेस ने जब मुसलमानों के तुष्टीकरण की नीति अपनाई तो कितने ही हिंदू देशभक्तों को बड़ी the body of lies झुठ का पुलिँदा निराशा हुई। फलस्वरूप सन् 1910 में पूज्य पं. मदनमोहन मालवीय के नेतृत्व में प्रयाग में हिंदू महासभा की स्थापना की गई।

सन् 1916 में लोकमान्य तिलक की अध्यक्षता में लखनऊ में कांग्रेस अधिवेशन हुआ। यद्यपि तिलक जी भी मुस्लिमपोषकनीति से क्षुब्ध थे, फिर भी लखनऊ कांग्रेस ने ब्रिटिश अधिकारियों के प्रभाव में पड़कर एकता और राष्ट्रहित की दोहाई देकर मुस्लिम लीग से समझौता किया जिसके कारण सभी प्रांतों में मुसलमानों को विशेष अधिकार और संरक्षण प्राप्त हुए। अंग्रेजों ने भी अपनी कूटनीति के अनुसार चेम्सफोर्ड योजना बनाकर मुसलमानों के विशेषाधिकार पर मोहर लगा दी।

हिंदू महासभा ने सन् 1917 में हरिद्वार में महाराजा नंदी कासिम बाजार की अध्यक्षता में अपना अधिवेशन करके कांग्रेस लीग समझौते तथा चेम्सफोर्ड योजना का तीव्र विरोध किया किंतु हिंदू बड़ी संख्या में कांग्रेस के साथ थे अत: सभा के विरोध का कोई परिणाम न निकला।

अंग्रेजों ने स्वाधीनता आंदोलन का दमन करने के लिए रौलट ऐक्ट बनाकर क्रांतिकारियों को कुचलने के लिए पुलिस और फौजी अदालतों को व्यापक अधिकार दिए। कांग्रेस की तरह हिंदू महासभा ने भी इसके विरुद्ध आंदोलन चलाया, पर मुसलमान आंदोलन से दूर थे। उसी समय गांधी जी ने तुर्की के खलीफा को अंग्रेजों द्वारा हटाए जाने के विरुद्ध तुर्की के खिलाफत आंदोलन के समर्थन में भारत में भी खिलाफत आंदोलन चलाया। हजारों हिंदू इस आंदोलन में जेल गए परंतु खिलाफत का प्रश्न समाप्त होने ही मुसलमानों ने पुन: कोहाट, मुलतान और मालावार आदि में मार-काट कर सांप्रदायिकता की आग भड़काई।

हिंदू महासभा भी राष्ट्रीय एकता समर्थक है किंतु उसका मत यह रहा है कि देश की बहुसंख्यक जनता हिंदू है, अत: उसका हित ही वस्तुत: राष्ट्र का हित है। सभा इसे सांप्रदायिकता नहीं समझती। मुसलमान इस देश में न रहें, यह उसका लक्ष्य है ।

हिंदू महासभा का काशी अधिवेशन

सन् 1923 के अगस्त मास में हिंदू महासभा का अधिवेशन काशी में हुआ, जिमें सनातनी, आर्य समाज के सदस्य, सिक्ख, जैन, बौद्ध आदि सभी संप्रदाय के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए। हिंदू महासभा के इस अधिवेशन ने हिंदुओं को सांत्वना एवं साहस प्रदान किया और वे पूज्य मालवीय जी, स्वामी श्रद्धानंद, लाला लाजपत राय के नेतृत्व में हिंदू महासभा द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने पर प्रयत्न करने लगे। अधिवेशन में संपूर्ण देश में बलपूर्वक मुसलमान बनाए गए हिंदुओं को शुद्ध करने का निश्चय किया गया। तदनुसार संपूर्ण देश में शुद्धि का आंदोलन चल पड़ा जिसमें पूज्य स्वामी श्रद्धानंद प्राणपण से जुट गए। फलस्वरूप शीघ्र हो 50-60 हजार मलवाना राजपूत पुन: शुद्ध होकर हिंदू बन गए। इसपर एक धर्मांध मुसलमान अब्दुल रशीद ने स्वामी श्रद्धानंद जी की हत्या कर दी।

सन् 1926 का साधारण निर्वाचन

सन् 1925 में कलकत्ता नगरी में ला. लाजपत राय जी की अध्यक्षता में हिंदू महासभा का अधिवेशन हुआ जिसमें प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता डा. जयकर भी सम्मिलित हुए।

सन् 1926 में देश में प्रथम निर्वाचन होने जा रहा था। अंग्रेजों ने कांग्रेस लीग गठ-बंधन को असफल बनाने एवं मुसलमानों को राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में विद्रोह और विद्वेष फैलाए रखने के लिए अपनी ओर से असंबलियों में मुसलमानों के लिए स्थान सुरक्षित कर दिए। इस बात की चेष्टा होने लगी कि हिंदू सीटों पर कट्टर हिंदू सभाइयों के बजाय ढुलमुल मुस्लिमसमर्थक कांग्रेसी ही चुने जाएँ। हिंदूमहासभा ने पृथक् निर्वाचन के सिद्धांत और मुसलमानों के लिए सीटें सुरक्षित करने की तीव्र विरोध किया और निश्चय किया कि चुनाव में अपने प्रखर राष्ट्रवादी प्रतिनिधि भेजे जाएँ, जो अंग्रेज-मुस्लिमषड्यंत्र का डटकर विरोध कर सकें, हिंदू महासभा के प्रमुख नेता संपूर्ण देश में दौरा करके हिंदुओं में नया जीवन और चेतना उत्पन्न करने लगे। परिणामस्वरूप हिंदू सभा को चुनाव में अच्छी सफलता मिली। इसी समय बंगाल के मुसलमानों ने पुन: अपने अंग्रेज मित्रों के संकेत पर कलकत्ता में समाज के जुलूस पर आक्रमण करके दंगे आरंभ कर दिए परंतु इसका परिणाम उनको महँगा पड़ा।

साइमन कमीशन और हिंदू महासभा

जब अंग्रेजों का साइमन कमीशन, रिफार्म ऐक्ट में सुधार के लिए भारत आया, तो हिंदू महासभा ने भी कांग्रेस के कहने पर इसका बहिष्कार किया। लाहौर में हिंदू महासभा के अध्यक्ष लाला लाजपत राय हिंदू महासभा के हजारों स्वयंसेवकों के साथ काले झंडे लेकर कमीशन के बहिष्कार के लिए एकत्र हुए। पुलिस ने बहुत ही निर्दयता से लाठी प्रहार किया, जिसमें लाला जी को भी काफी चोट आई और वह फिर बिस्तर से न उठ सके। थोड़े ही समय में लाहौर में उनका स्वर्गवास हो गया।

ब्रिटिश सरकार ने लंदन में गोलमेज सम्मेलन आयोजित करके हिंदू, मुसलमान, सिक्ख आदि सभी के प्रतिनिधियों को बुलाया। हिंदू महासभा की ओर से डा. धर्मवीर, मुंजे, बैरिस्टर जयकर आदि सम्मिलित हुए। गांधी जी ने लंदन गोलमेज सम्मेलन में पुन: मुस्लिम सहयोग प्राप्त करने के लिए मुसलमानों को कोरा चेक दे दिया, परंतु फिर भी सौदेबाज में वह अंग्रेजों से जीत न सके। अंग्रेजों ने अपनी ओर से सांप्रदायिक निर्णय देकर हिंदुओं के अधिकार घटाकर मुसलमानों के अधिकार और अधिक बढ़ा दिए। हिंदूमहासभा ने इसका तीव्र विरोध किया। सन् 1929 से लेकर सन् 1936 तक श्री रामानंद चटर्जी तथा केलकर आदि अध्यक्ष होते हुए भी वस्तुत: भाई परमानंद जी तथा डा. मुंजे ही हिंदू सभा की बागडोर चलाते रहे। डा. मुंजे ने नासिक में हिंदुओं को सैनिक शिक्षा देने के लिए भोसला मिलिट्री कालेज की भी स्थापना की। हिंदू महासभा ने सिंध प्रांत को बंबई से अलग करने का भी तीव्र विरोध किया।

वीर सावरकर का आगमन

सन् 1937 में जब हिंदू महासभा काफी शिथिल पड़ गई थी और हिंदू जनता गांधी जी की ओर झुकती चली जा रही थी, तब भारतीय स्वाधीनता के लिए अपने परिवार को होम देनेवाले तरुण तपस्वी स्वातंत्र्य वीर सावरकर कालेपानी की भयंकर यातना एवं रत्नागिरि की नजरबंदी से मुक्त होकर भारत आए। स्थिति समझकर उन्होंने निश्चय किया कि राष्ट्र की स्वाधीनता के निमित्त दूसरों का सहयोग पाने के लिए सौदेबाजी करने की अपेक्षा हिंदुओं को ही संगठित किया जाए।

वीर सावरकर ने सन् 1937 में अपने प्रथम अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हिंदू ही इस देश के राष्ट्रीय हैं और आज भी अंग्रेजों को भगाकर अपने देश की स्वतंत्रता उसी प्रकार प्राप्त कर सकते हैं, जिस प्रकार भूतकाल में उनके पूर्वजों ने शकों, ग्रीकों, हूणों, मुगलों, तुर्कों और पठानों को परास्त करके की थी। उन्होंने घोषणा की कि हिमालय से कन्याकुमारी और अटक से क़टक तक रहनेवाले वह सभी धर्म, संप्रदाय, प्रांत एवं क्षेत्र के लोग जो भारत भूमि को पुण्यभूमि तथा पितृभूमि मानते हैं, खानपान, मतमतांतर, रीतिरिवाज और भाषाओं की भिन्नता के बाद भी एक ही राष्ट्र के अंग हैं क्योंकि उनकी संस्कृति, परंपरा, इतिहास और मित्र और शत्रु भी एक हैं – उनमें कोई विदेशीयता की भावना नहीं है।

वीर सावरकर ने अहिंदुओं का आवाहन करते हुए कहा कि हम तुम्हारे साथ समता का व्यवहार करने को तैयार हैं परंतु कर्तव्य और अधिकार साथ साथ चलते हैं। तुम राष्ट्र को पितृभूमि और पुण्यभूमि मानकर अपना कर्तव्यपालन करो, तुम्हें वे सभी अधिकार प्राप्त होंगे जो हिंदू अपने देश में अपने लिए चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि तुम साथ चलोगे तो तुम्हें लेकर, यदि तुम अलग रहोगे तो तुम्हारे बिना और अगर तुम अंग्रेजों से मिलकर स्वतंत्रता संग्राम में बाधा उत्पन्न करोगे तो तुम्हारी बाधाओं के बावजूद हम हिंदू अपनी स्वाधीनता का युद्ध लड़ेंगे।

हैदराबाद का सत्याग्रह

इसी समय मुस्लिम देशी रियासतों में अंग्रेजों के वरदहस्त के कारण वहाँ के शासक अपनी हिंदू जनता पर भयंकर अत्याचार करके उनका जीवन दूभर किए हुए थे, अतएव हिंदू महासभा ने आर्यसमाज के सहयोग से निजाम हैदराबाद के पीड़ित हिंदुओं के रक्षार्थ सन् 1939 में ही संघर्ष आरंभ कर दिया और संपूर्ण देश से हजारों सत्याग्रही निजाम की जेलों में भर गए। हैदराबाद के निजाम ने समझौता करके हिंदुओं पर होनेवाले प्रत्यक्ष अत्याचार बंद कराने की प्रतिज्ञा की।

सन् 1936 के निर्वाचनों में जब मुस्लिम लीग के कट्टर अनुयायी चुनकर गए और हिंदू सीटों पर कांग्रेसी चुने गए, जो लीग की किसी भी राष्ट्रद्रोही माँग का समुचित् उत्तर देने में असमर्थ थे, तब पाकिस्तान बनाने की माँग जोर पकड़ती गई। हिंदु महासभा ने अपनी शक्ति भर इसका विरोध किया।

भागलपुर का मोर्चा

सन् 1941 में भागलपुर अधिवेशन पर अंग्रेज गवर्नमेंट की आज्ञा से प्रतिबंध लगा दिया गया कि बकरीद के पहले हिंदू महासभा अपना अधिवेशन न करे, अन्यथा हिंदू मुस्लिम दंगे की संभावना हो सकती है। वीर सावरकर ने कहा कि हिंदुमहासभा दंगा करना नहीं चाहती, अत: दंगाइयों के बदले शांतिप्रिय नागरिकों के अधिकारों का हनन करना घोर अन्याय है। वीर सावरकर लगभग 5,000 प्रतिनिधियों के साथ भागलपुर जा रहे थे कि अंग्रेजी सरकार ने उन्हें गया में ही रोककर गिरफ्तार कर लिया। भाई परमानंद, डा. मुंजे, डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आदि नेता भी बंदी बनाए गए, फिर भी न केवल भागलपुर में वरन् संपूर्ण बिहार प्रांत में तीन दिनों तक हिंदू महासभा के अधिवेशन आयोजित हुए जिसें वीर सावरकर का भाषण पढ़ा गया तथा प्रस्ताव पारित हुए।

घोर विरोध के बावजूद पाकिस्तान की स्थापना

हिंदू महासभा के घोर विरोध के पश्चात् भी अंग्रेजों ने कांग्रेस को राजी करके मुसलमानों को पाकिस्तान दे दिया और हमरी परम पुनीत भारत भूमि, जो इतने अधिक आक्रमणों का सामना करने के बाद भी कभी खंडित नहीं हुई थी, खंडित हो गई। हिंदू महासभा के नेता महात्मा रामचन्द्र वीर (हिन्दु सन्त, कवि, लेखक) और वीर सावरकर ने विभाजन का घोर विरोध किया। यद्यपि पाकिस्तान की स्थापना हो जाने से मुसलमानों की मुंहमाँगी मुराद पूरी हो गई और भारत में भी उन्हें बराबरी का हिस्सा प्राप्त हो गया है, फिर भी कितने ही मुसलिम नेता तथा कर्मचारी छिपे रूप से पाकिस्तान का समर्थन करते तथा भारतविरोधी गतिविधियों में सहायक होते रहते हैं। फलस्वरूप कश्मीर, असम, राजस्थान आदि में अशांति तथा विदेशी आक्रमण की आशंका बनी रहती है।

वर्तमान समय में देश की परिस्थितियों को देखते हुए हिंदू महासभा इसपर बल देती है कि देश की जनता को, प्रत्येक देशवासी को अनुभव करना चाहिए कि जब तक संसार के सभी छोटे मोटे राष्ट्र अपने स्वार्थ और हितों को लेकर दूसरों पर आक्रमण करने की घात में लगे हैं, उस समय तक भारत की उन्नति और विकास के लिए प्रखर हिंदू राष्ट्रवादी भावना का प्रसार तथा राष्ट्र को आधुनिकतम अस्त्रशस्त्रों से सुसज्जित होना नितांत आवश्यक है।

नन्‍द किशोर मिश्र को हिन्‍दू महासभा से निकाला गया

नन्‍द किशोर मिश्र को हिन्‍दू महासभा से निकाला गया

अखिल भारत हिन्‍दू महासभा के नेता नंद किशोर मिश्रा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्‍त होने के कारण उन्‍हेें हिन्‍दू महासभा से बाहर निकाल नकाल दिया गया है। सरदार रवि रंजन सिंह (वरिष्‍ठ नेता, हिन्‍दू महासभा)   Read More »

डा. पवन कुमार सिरोलिया ने हिंदू राजस्थान महासभा से त्याग पत्र दिया

डा. पवन कुमार सिरोलिया ने हिंदू राजस्थान महासभा से त्याग पत्र दिया

Read More »

जयपुर में होगी हिन्दू महासभा की आगामी बैठक

जयपुर में होगी हिन्दू महासभा की आगामी बैठक

अखिलभारतहिन्दूमहासभा हिंदुमहासभाभवन, मंदिरमार्ग,नईदिल्ली-110001   ABHMS/36/2017                                                                                    14/07/2017   सूचना अखिल भारत हिन्दू महासभा की केन्द्रीय महासमिति की बैठक श्रीश्री आचार्य रमेश मिश्र, बाबा नन्द किशोर मिश्र, आचार्य मदन सिंह, सरदाररवि रंजन सिंह, श्री राकेश लिमये एवं 11 प्रदेशों की सहमती से आहुत की जा रही है ! बैठक: दिनांक 30 जुलाई 2017, श्रावण शुक्ल सप्तमी, विक्रमी संवत 2074, रविवार, समय प्रातः ... Read More »

पदमाराम जांगिड बने राजस्‍थान हिन्‍दू महासभा के अध्‍यक्ष

पदमाराम जांगिड बने राजस्‍थान हिन्‍दू महासभा के अध्‍यक्ष

राजस्‍थान  हिन्‍दू महासभा का पुनर्गठन जयपुर । गत दिनों  पं0 बाबा नंद किशोर के नेतृत्‍व में पदमाराम जांगिड (इन्‍द्रोई) को राजस्‍थान प्रदेश का अध्‍यक्ष नियुक्‍त किया गया। तत्‍पश्‍चात पदमराम जी ने भी कुछ तेजतर्रार लोगों को अपने टीम में शामिल कर लिया जिनमें प्रमुख पदाधिकारी हैं : राजस्‍थानी कार्यकारी अध्‍यक्ष के रूप में नटवर लाल शर्मा जो सेवा निवृत्‍त पुलिस ... Read More »

गोरखा प्रदेश की तत्काल स्थापना हो : हिन्दू महासभा

गोरखा प्रदेश की तत्काल स्थापना हो : हिन्दू महासभा

नई दिल्ली : आज जंतर-मंतर पर गोरखा प्रदेश के समर्थन में एवं बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की दमनकारी नीति के विरुद्ध रविवार, दिनांक 18/06/2017 को प्रचंड रूप से गोरखा जनमुक्ति मोर्चा(GJM), गोरखा राज्य जन-मोर्चा, हिन्दू महासभा एवं अन्य संगठनों के नेतृत्व में विशाल प्रदर्शन हुआ और ममता बनर्जी की दमनकारी नीति की निंदा भी की गई ! ममता बनर्जी ... Read More »

सुश्री राज्‍यश्री चौधरी बनीं हिन्‍दू महासभा पं. बगाल की अध्‍यक्ष व बिहार प्रभारी

सुश्री राज्‍यश्री चौधरी बनीं हिन्‍दू महासभा पं. बगाल की अध्‍यक्ष व बिहार प्रभारी

     सुश्री राज्‍यश्री चौधरी को हिन्‍दू महासभा  पं. बगाल के अध्‍यक्ष बनाया गया है और इसके साथ-साथ  उन्‍हें बिहार प्रदेश के प्रभारी का भी दायित्‍व दिया गया है। उन्‍हें नियुक्‍ति पत्र देते हुए हिन्‍दू महासभा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष दिनेश चंद्र त्‍यागी ने कहा कि पं. बंगाल क्रांतिकारियों की भूमि है, हमें आशा है सुश्री चौधरी हिंदुत्‍व के लिए   ... Read More »

डॉ0 संतोष राय व उनके साथियों को दिल्‍ली पुलिस ने  गिरफ्तार किया

डॉ0 संतोष राय व उनके साथियों को दिल्‍ली पुलिस ने गिरफ्तार किया

नई दिल्‍ली। डॉ0 संतोष राय व उनके साथियों को दिल्‍ली पुलिस ने  गिरफ्तार कर लिया है। ज्ञात हो कि डॉ0 संतोष राय पेशे से डॉक्‍टर व समाज सेवी हैं जो कुलभूषण जाधव को पाकिस्‍तान में मौत की सजा पर पाकिस्‍तानी हाई कमीशन के सामने अपने साथियों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे। डॉ0 राय ने बताया कि  पाकिस्तान ने जाधव ... Read More »

सावर‍कर के सिद्धांतो पर चलकर ही देश बचेगा

सावर‍कर के सिद्धांतो पर चलकर ही देश बचेगा

समाज, देश, राष्ट्रवाद, संस्क‌ृति, सभ्यता व सत्य सनातन धर्म को बचाना है तो वीर वीनायक दामोदर सावरकर के सिद‌्धांतों पर चलना होगा।      सावरकर जी का स्पष्ट कहना था कि राजनीति का हिंदूकरण और हिंदुओं का सैनिकी करण आवश्यक है। इन्ही सिद‌्धांतो पर चलकर ही हम अपने राष्ट्र, समाज, संस्कृति और सभ्यता को हम सब बचा सकते हैं। यदि हमने ... Read More »

योगी आदित्‍य नाथ का उप्र का मुख्‍यमंत्री बनाए जाने पर ढेर सारी शुभकामनाएं

योगी आदित्‍य नाथ का उप्र का मुख्‍यमंत्री बनाए जाने पर ढेर सारी शुभकामनाएं

योगी आदित्‍य नाथ को उत्‍तर प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बनाए जाने पर अखिल भारत हिन्‍दू महासभा के वरिष्‍ठ नेता  पं बाबा नंद किशोर मिश्र व डा0 संतोष राय नें योगी आदित्‍य को ढेरों शुभकामनाएं दी है। अखिल भारत हिन्‍दू महासभा के कार्यकारी अध्‍यक्ष पं बाबा नंद किशोर मिश्र व डा0 संतोष राय नें कहा कि योगी जी को मुख्‍यमंत्री बनाया जाना ... Read More »

हिन्दू महासभा का बसपा को समर्थन नहीं

हिन्दू महासभा का बसपा को समर्थन नहीं

पार्टी के नाम का दुरूपयोग करने पर चक्रपाणि के खिलाफ होगी काररवाई हाईकोर्ट भी चक्रपाणि को हिन्दू महासभा का सदस्य मानने से कर चुकी है इंकार लखनऊ। अखिल भारत हिन्दू महासभा ने आज यहां स्पष्ट करते हुये कहा है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में किसी भी पार्टी को समर्थन नहीं कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकारी अध्यक्ष ... Read More »