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‘राष्ट्रहित’ में मोहम्मद अनवर बने आनंद भारती

मनीष शांडिल्य

बेगूसराय शहर के मोहम्मद अनवर अब आनंद भारती बन गए हैं. उनके दो बेटों का नाम अब अमन और सुमन भारती है. पहले अमन का नाम आमिर तो सुमन का समीर सुबहानी था.

अनवर उर्फ़ आनंद ने अपने दोनों बेटों के साथ चार जुलाई को हिंदू धर्म स्वीकार किया. आनंद पेशे से वकील हैं और धर्म बदलने का हलफ़नामा उन्होंने अदालत में भी जमा कर दिया है.

अनवर उर्फ आनंद के मुताबिक वे अपने आस-पास के मुस्लिम कट्टरपंथियों से परेशान होकर हिंदू बने हैं.

वे बताते हैं, “मुझे बच्चों को मदरसा भेजने के लिए मजबूर किया गया. मैं ईद-बकरीद के साथ-साथ होली-दीवाली जैसे त्योहारों में भी शामिल होता था. मैं अगर मैयत में मिट्टी देने का काम करता था तो हिंदुओं के दाह-संस्कार में भी शामिल होता था. इसके कारण मुझे तरह-तरह से टॉर्चर किया जाता था.”

दुविधा में हैं हिंदू धर्म छोड़ने वाले वाल्मीकि लोग

आनंद ने आगे बताया, “मेरे साथ ऐसा बीते आठ महीने से हो रहा था. मैं शुरू से ही गोमांस नहीं खाता. इसके लिए राज़ी नहीं होने पर भी मेरे साथ ज्यादती की गई. मेरे घर के आगे गोमांस की हड्डियां लगातार फेंकी जाती रहीं. मैंने मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों के सामने अपनी शिकायत रखी. लेकिन उन्होंने भी अपने लोगों का बचाव किया. मुझे इंसाफ़ नहीं दिलाया.”

बेगूसराय के पोखरिया तीन महला इलाके में आनंद का अपना मकान है. ये एक मुस्लिम बहुल इलाका है. आनंद भारती को सबसे अधिक शिकायत अपने पड़ोसी मोनाजिर हुसैन और उनके परिवार से है. मोनाजिर बेगूसराय सिविल कोर्ट के रिटायर्ड कर्मी हैं.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में आनंद के आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया.

वे कहते हैं, “हम लोगों ने उन्हें बच्चों को मदरसे में पढ़ाने के लिए कभी नहीं कहा. नमाज़ ना पढ़ने के सवाल पर भी हमने उन्हें कभी टोका. वे ही बात-बेबात आसपास के लोगों से झगड़ते रहते थे.”

मोनाजिर एक बात और ज़ोर देकर कहते हैं कि आनंद करीब एक साल से कहते आ रहे थे कि वे इस्लाम छोड़ हिंदू बन जाएंगे.

लेकिन आनंद इस बात से इंकार करते हुए कहते हैं, “मैं दोनों धर्मों के खूबियों और कमियों का अध्ययन कर रहा था. दो जुलाई को मेरे बच्चों के साथ राहजनी हुई. मेरे घर पर आकर लोगों ने मुझे घमकी दी. इसके बाद मैंने हिंदू धर्म अपनाने का फैसला कर लिया.”

आनंद के मुताबिक न तो वे हिंदू संगठन से जुड़े रहे हैं और ना ही उनके संपर्क में थे.

उनका कहना है, “दो जुलाई की घटना के बाद मेरे कुछ हिंदू मुवक्क्लिों ने बताया कि बजरंग दल राष्ट्रहित में बिछड़े भाइयों के एक होने का अभियान चला रहा है. और इससे सहमत होकर मैंने खुद बजरंग दल के जिला संयोजक शुभम भारद्वाज के समक्ष हिंदू बनने की ख्वाहिश जाहिर की.”

इसके बाद शहर के बिशनपुर इलाके के एक शिव मंदिर में चार जुलाई को विधिवत शुद्धिकरण के बाद मोहम्मद अनवर अपने दोनों बेटों के साथ हिंदू बने.

आनंद अपने मोहल्ले में जिस जगह मुझसे मिले उस वक्त उनके साथ शुभम भारद्वाज भी थे. आनंद के साथ उनके घर पर पूरी बातचीत के दौरान शुभम भी मौजूद रहे.

उन्होंने बताया, “जो लोग घर-वापसी करना चाहते हैं, उन्हें हम सहयोग करते हैं. कट्टर इस्लाम से पीड़ित लोग हमारे पास आते हैं तो हम उनकी मदद करते हैं. मोहम्मद अनवर ने भी दो जुलाई को हमसे मदद मांगी. फिर तीन जुलाई को हमारे ऑफिस आकर उन्होंने हिंदू संस्कृति स्वीकार करने की इच्छा जताई. इसके अगले दिन एक हवन कार्यक्रम आयोजित कर उनकी घर-वापसी कराई गई.”

शुभम के मुताबिक अनवर के आनंद बनने के बाद उन्हें और आनंद को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. खासकर सोशल मीडिया पर. लेकिन वे ये भी कहते हें कि वे इनसे निपटने के लिए खुद सक्षम हैं.

एक सवाल ये भी है अनवर उर्फ आनंद के फैसले पर क़ानून क्या कहता है?

पटना हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील सत्यवीर भारती बताते हैं, “भारत के नागरिकों को अपनी पसंद का धर्म मानने का मौलिक अधिकार है. यह अधिकार उन्हें अपना धर्म बदलने का भी हक़ देता है. संविधान का अनुच्छेद 25 नागरिकों के इस अधिकार की रक्षा करता है.”

इस्लाम से शिकायत नहीं…

इस्लाम से हिंदू धर्म कबूल करने के बावजूद आनंद यह भी कहते हैं कि उन्हें इस्लाम से कोई शिकायत नहीं है. उन्हें इस धर्म के ठेकेदारों से परेशानी हैं. हां, वे तीन तलाक, पैतृक संपत्ति में अधिकार, शहबानो केस जैसे कुछ मुद्दों के हवाले से इस्लाम में सुधार की बात ज़रुर करते हैं.

आनंद कहते हैं, “इस्लाम की नींव में जाति व्यवस्था नहीं थी. लेकिन आज भारत में यह बुराई इस्लाम में मौजूद है.” वे इसके लिए अगड़े मुसलमानों खासकर सैयद जाति के कथित ठेकेदारों को ज़िम्मेदार बताते हैं.

जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न तो हिंदू धर्म में भी माना जाता है, वहां आपको इससे कैसे निजात मिलेगी?

इसके जवाब में वे कहते हैं, “विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल द्वारा हिंदू धर्म में समानता का अभियान चलाया जा रहा है. ‘ब्राह्मण हो या पासवान, हिंदू-हिंदू एक समान’ का नारा दिया जा रहा है. बेटी-रोटी का संबंध स्थापित करने की कोशिशें जारी हैं. ऐसे में हिंदू धर्म में उम्मीद है.”

आनंद बने अनवर पूरी बातचीत में रह-रह कर जिन शब्दों और तर्कों का इस्तेमाल करते हैं उस पर कुछ ऐसे हिंदू संगठनों की छाप दिखाई देती है जो मुसलमानों की देशभक्ति पर शक करते हैं. उन्हें आतंकवाद के पर्याय के रूप में पेश करते हैं.

जैसा कि वे कहते हैं, “मैं राष्ट्रहित में हिंदू बना हूं. राष्ट्रहित में यह ज़रूरी है कि देश में केवल एक धर्म सनातन धर्म हो. इस्लाम में आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा.”

बतौर हिंदू उनके घर और ज़िंदगी में बदलाव भी शुरू हो गए हैं. उन्होंने बताया, “घर में हनुमान चालीसा ले आए हैं. गंगा के किनारे स्थित सिमरिया धाम जाकर पूजा भी की. नहाने के बाद और सोने के समय भगवान को याद करते हैं.”

हिंदू बनने के बाद क्या उन्हें परेशान भी किया जा रहा है? इसके जवाब में आनंद ने बताया, “बीते शुक्रवार को उन्हें मुस्लिम युवकों के एक समूह ने धमकाया था. इसकी लिखित शिकायत पर पुलिस ने मुझे एक पिस्टल धारी बॉडीगार्ड मुहैया कराया है.”

बेगूसराय के वरिष्ठ वकील मजहरुल हक पोखरिया इलाके में ही रहते हैं और आनंद उनके सहकर्मी भी हैं. वे बताते हैं कि आनंद का हिंदू धर्म के प्रति झुकाव पहले से था.

वे कहते हैं, “जहां तक मुझे जानकारी है उनकी मोटर बाइक पर ओम भी लिखा हुआ है. रोज़ा-नमाज़ वे नहीं करते थे. ये उनका व्यक्तिगत मामला था और इससे किसी को परेशानी नहीं थी.”

लेकिन वे भी इससे इंकार करते हैं कि आनंद पर अपने बच्चों को मदरसा में पढ़ाने के लिए दवाब डाला जा रहा था. इसे वे पूरी तरह आधारहीन बताते हुए कहते हैं कि शहर की मुस्लिम आबादी में अब गिने-चुने लोग ही बच्चों को मदरसा भेजते हैं.

मजहरूल के मुताबिक मुस्लिम समाज आनंद के फैसले से अपमानित ज़रूर महसूस कर रहा है लेकिन समाज न तो कोई प्रतिक्रिया दे रहा है और न देना चाहता है.

वे आगे कहते हैं, “कुछ लोग इस मामले को सांप्रदायिक रंग देना चाहते हैं. इस हालात से बचने के लिए मुस्लिम समाज ने आपसी बातचीत से तय किया है इस मुद्दे को अहमियत न देते हुए इसे खुद-ब-खुद ख़त्म होने दिया जाए.”

मजहरूल शुक्रवार के दिन आनंद को धमकी दिए जाने की बात को भी गलत बताते हैं.

आनंद के मुताबिक उन्होंने धर्म बदलने से पहले अपने करीबी रिश्तेदारों से राय-मशवरा नहीं किया था. वे बुझी आवाज में कहते हैं, “धर्म बदलने से घरवाले तकलीफ में हैं. उनको लगता है कि अब मैं उनसे बिछड़ गया हूं.”

पोखरिया इलाके में ही उनके पिता और सौतेली मां किराए के मकान में रहती हैं. उनकी मां कहती हैं, “हम तो शर्म से डूबे जा रहे हैं. वह (अनवर) जिए या मरे, हमें उससे अब कोई मतलब नहीं है.”

आनंद की सौतेली मां इस घटना से इतनी परेशान हैं कि बार-बार पूछे जाने पर भी उन्होंने अपना नाम नहीं बताया. दूसरी ओर आनंद ने अपनी पत्नी शबनम सितारा से भी बीबीसी की बातचीत नहीं करवाई.

आनंद के मुताबिक धर्म परिवर्तन के बाद के घटनाक्रम से वो परेशान हैं. हालांकि उन्होंने इस बात पर बार-बार जोर दिया कि मजहब बदलने का फैसला उन्होंने अपनी पत्नी की रजामंदी से किया है.

लेकिन दिलचस्प यह कि शबनम न तो धर्म बदलने के लिए मंदिर गई थीं. न ही उन्होंने अपना नाम ही अब तक बदला है. पत्नी के नाम नहीं बदले जाने के सवाल पर आनंद कहते हैं, “उनका नाम ऐसा है जो हिंदू-मुसलमान सभी रखते हैं, इसलिए उन्होंने नाम नहीं बदला है.”

वहीं चार जुलाई के बाद उनके बच्चों ने सोमवार को फिर से स्कूल जाना शुरू किया है. वो शहर के एक निजी इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते हैं.

Source : BBC

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