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कोलकाता हाईकोर्ट को जेहादी ममता दीदी ने दिखाया ठेंगा

जेहादी दीदी ममता (मुमताज बनर्जी) नें पं0 बंगाल के  हाईकोर्ट को ठेंगा दिखाते हुए उसके आदेशों की पूूूूरी धज्जियां उड़ा दी। ज्ञात रहे की हिन्‍दू महासभा की कद्ददावर नेत्री सुश्री राज्‍यश्री चौधरी ने गत माह कोलकाता हाईकोर्ट में एक रिट दायर किया था जिसमें गाय को काटने पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की गई थी, जिसमें वहां के तत्‍कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश निशाता महात्रे व न्यायाधीश तपव्रत चक्रवर्ती नें पं0 बंगाल में गाय कटने पर पूर्ण प्रतिबंध का आदेश दे दिया था और इतना ही नहीं बल्कि पंं0 बंंगाल सरकार को यह आदेश दिया गया था क‍ि अखबारों में विज्ञापन देकर सबको यह बताए कि गो हत्‍या पर अब पूूूूर्ण प्रतिबंध लग गया है किंतु पं0 बंगाल की ममता सरकार नें अखबारों में इतने छोटे विज्ञापन छपवाए कि वो जनता को नजर ही न आए। आप स्‍वयं कोलकाता हाईकाेर्ट के आदेश को पढ़कर वस्‍तुि‍स्थित से पचित हो सकते हैैं :

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    आदेश पत्रक

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2017 के रिट नंबर 497

कोलकता उच्च न्यायालय

राज्यश्री चौधरी

बनाम

पश्चिम बंगाल और अन्य

 इससे पहले कि:

 माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश निशाता महात्रे

 तथा

 माननीय न्यायाधीश तपव्रत चक्रवर्ती

 दिनांक: 1 सितंबर, 2017

न्यायालय : यह जनहित याचिका दायर कर रही है कि यह

राज्य को जनता को सूचित करना चाहिए कि कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं

कानून द्वारा और साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए और इस उच्च

पशु बलि के लिए न्यायालय में याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे को उठाया है क्योंकि

आगामी बकरी-ईद त्यौहार, जो कल मनाया जाएगा।

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एक ज्ञापन प्रिंसिपल सेक्रेटरी द्वारा जारी किया गया है

पश्चिम बंगाल सरकार, 28 वीं पर पशु संसाधन विकास विभाग

अगस्त, 2017 पुलिस, जिला मजिस्ट्रेट्स,  दूध सहित विभिन्न अधिकारियों के लिए

आयुक्त आदि से अनुरोध किया कि सभी प्रयासों को सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए

कि “पश्चिम बंगाल पशु वध अधिनियम 1950”  के प्रावधानों में निहित निर्देश

एवं  “प्राणियों के लिए क्रूरता की रोकथाम (वध घर) नियम 2001”

माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के साथ-साथ मनाया जाता है

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ईद-उद-जोहा के त्यौहार के दौरान भारत और इस न्यायालय का इस ज्ञापन में

पिछले वर्षों के समान ही जारी किया गया है।

यद्यपि यह ज्ञापन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त होगा कि व्यक्तियों

जिन्हें आवश्यक कार्रवाई के लिए ज्ञापन भेजा गया है, उस पर कार्य करेंगे

कर्तव्यों कि प्रतिबंधों को लागू किया जाता है,  बड़े पैमाने पर जनता को उसके बारे में पता नहीं हो सकता है

प्रतिबंध या तो न्यायालय के फैसले या 1950 के अधिनियम में निहित हैं

और इसके तहत बनाए गए नियम। यह निर्दोष व्यक्ति की ओर हो सकता है

उनके अभियोजन पक्ष के लिए प्रतिबंधों के बावजूद बाध्य होने वाले प्रतिबंधों से अनजान हैं।

इस मामले के इस दृष्टिकोण में,  हमारी राय हैं कि राज्य को चाहिए

प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों में पहले से पर्याप्त रूप से विज्ञापन दें

प्रतिबंध जो कि फैसले और साथ ही उन में शामिल हैं

इसके तहत तैयार किए गए अधिनियम और नियम इन प्रतिबंधों को कम से कम विज्ञापित किया जाना चाहिए

हर साल ईद-उद-जोह त्योहार से एक हफ्ते पहले। हालांकि, जो त्योहार के लिए है

कल मनाया जाएगा,  हम राज्य को इन प्रतिबंधों को विज्ञापित / प्रकाशित करने का निर्देश देते हैं

इस शाम तक इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया और कल सुबह में नवीनतम

बंगाली, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी ताकि लोगों को इनके बारे में पता चल सके

इस रिट याचिका इस प्रकार है, इसका निपटान

इस आदेश की तत्काल हस्ताक्षर किए फोटोस्टेट प्रति पक्ष पार्टियों को आपूर्ति की जाएगी।

 (कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश निशाता महात्रे)

 (न्यायाधीश तपव्रत चक्रवर्ती)

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      पता नहीं सुश्री जेहादी ममता बनर्जी हिन्‍दुओं से इतनी नफरत है कि हिंदुओं का हर हाल में बर्बादी चाहती हैं और राज्‍य से हर हिंदू प्रतीकों व हिंदुओं को पूर्णरूपेण समाप्‍त करवा देेेेना चाहती हैैं।

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