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हाई कोर्ट के फैसले के बाद मैंने मांस खाना शुरू कर दिया है : आज़म खान

अवैध बुचड़खाने को लेकर उत्तर प्रदेश में खूब राजनीति हो रही है। नई सरकार ने कई अवैध बुचड़खाने बंद कराए। लेकिन अब कोर्ट यह चाह रही है कि सरकार संजिदा रूप से इस मसले का हल निकाले। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि किसी को क्या खाना है इसपर रोक नहीं लगनी चाहिए। कोई भी मांसाहार हो सकता है इसपर रोक नहीं लगनी चाहिए।

अवैध बूचड़खाने

न्यायालय ने सरकार को हिदायत तक दी है कि अगर वैध बूचड़खाने नहीं है तो इसको तुरंत से बनवाने की जरूरत है। सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। न्यायलय ने यह यह भी निर्देश जारी किए हैं कि जिसके भी लाइसेंस खत्म हो गए हैं उसके लाइसेंस 17 जुलाई तक जारी कर दिए जाएं।

गौरतलब है कि वैध बूचड़खाने को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी जिसके तहत 31 मार्च को लाइसेंस खत्म हो गया लेकिन नवीनीकरण की दिशा में सरकार कोई कदम नहीं उठा रही थी। योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में सत्ता संभालते ही पहले कार्यों में अवैध बूचड़खाने को बंद करने का निर्देश जारी किया जिसके तहत प्रदेश में चल रहे बूचड़खाने बंद हो गए।

बूचड़खाने के लिए लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए हैं

योगी आदित्यनाथ बूचड़खाने को लेकर कई साल से उत्तर प्रदेश में आंदोलन चला रहे हैं जिसे उन्होंने मुख्यमंत्री बनते ही लागू कर दिया। जिसके बाद कई सवाल खड़े हुए कि आखिर कोई अगर मांस खाता है तो उसे कैसे रोका जा सकता है। प्रदेश में इसको लेकर हिंसक छड़पें हो चुकी हैं।

सरकार के सख्त हिदायत से अवैध बूचड़खाने बंद हो गए और जिनके लाइसेंस का समय समाप्त हो गया उन्हें भी मजबूरन अपने बूचड़खाने बंद करना पड़ा। सरकार कोई इसके लिए लाइसेंस जारी नहीं कर रही थी। अब देखना है कि जब न्यायालय ने बूचड़खाने के लिए लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए हैं और जिनके हैं उसे आगे लाइसेंस जारी करने को कहा है इसके लिए समय 17 जुलाई तय की गई है। अब देखना है कि योगी आदित्यनाथ इसपर क्या कदम उठाते हैं।

source : mobilenews24

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